जस्टिस राकेश बोले- मैंने दुर्गंध को रोकने की ईमानदारी से कोशिश की, यह कुछ लोगों को पसंद नहीं आई



पटना. अपने बहुचर्चित आदेश से पटना हाईकोर्ट को कठघरे में खड़ा कर, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की देशव्यापी बहस कराने के किरदार, जस्टिस राकेश कुमार ने सोमवार को इस कोर्ट को अलविदा कह दिया। वह 8 को आंध्रप्रदेश में न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। उनके आदेश पर मचा बड़ा बवेला, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाकायदा हस्तक्षेप से तात्कालिक तौर पर शांत सा दिखा। बाद में जस्टिस राकेश द्वारा हाईकोर्ट रजिस्ट्री की सीबीआई जांच के आदेश से फिर हलचल मची। पेश है जस्टिस राकेश से अरविंद उज्ज्वल की बातचीत के खास अंश; उन्हीं की जुबानी…

मैंने भ्रष्टाचार को लेकर जो तीन-चार मुद्दे उठाए थे, उस पर कार्रवाई करने की बजाय मेरे आदेश को ही गलत ठहराया गया। मैंने, जिस दिन भ्रष्टाचार को लेकर आदेश दिया था, उसी दिन मुझे पता था कि मेरा ट्रांसफर होगा। इसलिए मुझे किसी बात का मलाल नहीं है। मुझे जो सही लगा, मैंने वही किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा आवाज बुलंद करता रहा हूं। वकालत के दौरान भी अगर भ्रष्टाचार की जानकारी मिलती थी, तो मैं शिकायत दर्ज करने से चूकता नहीं था।

मैंने हमेशा गंदगी दूर करने की कोशिश की

अरे, गंदगी को ढंकने के लिए पर्दा उतना ही डालिए, ताकि वह छिपी रहे। जब गंदगी दुर्गंध करने लगे, तो यह पर्दा डालने से कम नहीं होती। मैंने दुर्गंध को रोकने का प्रयास किया, जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आया। न्यायिक कार्यों के अलावा जब प्रशासनिक कार्य का दायित्व मिला, तो बहुत बातों की जानकारी हुई। मैंने हमेशा गंदगी दूर करने की कोशिश की। क्योंकि समय रहते यह दूर नहीं की गई, तो स्थिति बिगड़ेगी, और अंतत: इसे दूर करना असंभव होगा।

जज की नियुक्ति के लिए भेजे गएनाम भी गेम
कई बातें हैं। वकील कोटे से जज की नियुक्ति के लिए जो नाम भेजे गए, उसमें भी गेम खेला गया। खेलने वाले कामयाब रहे। लोगों में गलत संदेश गया। सार्वजनिक विरोध भी हुआ। न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए जो भी संभव हुआ, मैंने किया। जो भी दायित्व मिला, उसे ईमानदारी से निभाया। कभी भी, किसी का चेहरा और कद देखकर काम नहीं किया। यहां से अपनों का प्यार व स्नेह लेकर जा रहा हूं। नई जिम्मेदारी भी ईमानदारी से निभाऊंगा।

पूर्व आईएएस अफसर केपी रमैया को जिस तरह न्यायपालिका का संरक्षण मिला, उसे देखकर लगा कि मुझे आंखें बंद नहीं करनी चाहिए। इसलिए जो सही लगा, वह किया।

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interview with Justice Rakesh Kumar