पाकिस्तान ने आतंकवाद पर अमेरिकी रिपोर्ट को गलत बताया; कहा- 20 साल तक कुर्बानियां दी हैं



इस्लामाबाद. अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तो में एक बार फिर तनाव की आशंका है। पाकिस्तान ने अमेरिकी विदेश विभाग के उन आरोपों पर नाराजगी जताई, जिनमें कहा गया था कि उसने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ सख्त और कारगर कदम नहीं उठाए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा- हमने दो दशक तक अपने नागरिकों और फौजियों की कुर्बानियां दी है। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट अफसोसनाक है। हम इसे खारिज करते हैं।

रिपोर्ट सही नहीं
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी किया। इसमें अमेरिकी विदेश विभाग की ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2018’ पर अपना पक्ष जाहिर किया गया। इसके मुताबिक, “यह रिपोर्ट निराशाजनक है। इसमें जमीनी हकीकत और तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। हमने दो दशक तक कुर्बानियां दी हैं। अल-कायदा का क्षेत्र से खात्मा किया। दुनिया को ज्यादा महफूज बनाने में मदद की। पाकिस्तान को खुद कई आतंकी गुटों से खतरा है। पाकिस्तान की वजह से ही अफगान तालिबान और अमेरिका बातचीत की टेबल पर आ पाए।”

पाकिस्तान पर संगीन इल्जाम
अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकियों को फंडिंग, भर्ती और उनकी ट्रेनिंग रोकने में नाकाम रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान को अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगार भी बताया गया। यहां के राजनेताओं ने तालिबान को खुलेआम समर्थन दिया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आतंकी संगठनों ने बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में सरकारी, गैर-सरकारी संगठनों और डिप्लोमेटिक मिशनों को लगातार निशाना बनाया। आतंकी संगठन पाकिस्तान के अलावा पड़ोसी देशों में भी हमलों को भी अंजाम देते रहे हैं।

टेरर फंडिंग रोकने में पाकिस्तान नाकाम
जुलाई 2018 में जमात-उद-दावा सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने राजनीतिक पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) बनाकर चुनाव लड़ा था। इस पर रिपोर्ट में कहा गया कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा की फंडिंग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान सरकार इस पर लगाम लगाने में नाकाम रही।

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अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में पाकिस्तान पर आतंकवाद के समर्थन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। (प्रतीकात्मक)