पुरानी चीजों से बने नए उत्पादों के मूल्य बढ़ाने का तरीका है एर्गोनॉमिक्स : प्रो. रोजमेरी




जालंधर | डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 17वीं एनुअल इंटरनेशनल कांफ्रेंस ह्यूमनाइजिंग वर्क एंड वर्क एंवायरोमेंट की शुरुआत की गई। इसमें इंडियन सोसायटी ऑफ एर्गोनॉमिक्स अौर इंटरनेशनल एर्गोेनॉमिक्स एसोसिएशन सहयोग कर रहे हैं। सम्मेलन के आयोजक डॉ. अरविंद भारद्वाज अौर डॉ. एलपी सिंह ने बताया कि कांफ्रेंस में 15 की-नोट स्पीकर अौर 20 मुख्य लेक्चर होंगे। डायरेक्टर डॉ. एलके अवस्थी ने कहा कि उद्योग में एर्गोनॉमिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। ब्राजील, जापान, रूस, चीन, फिलीपींस, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आए 175 रिसर्चर अौर प्रतिनिधियों ने अपने रिसर्च पेपर प्रेजेंट किए। सम्मेलन का एक बहुत ही खास हिस्सा एशियाई परिषद की एर्गोनॉमिक्स और डिजाइन की पहली एसीईडी बैठक के रूप में देखा गया, जो पहली बार भारत में और एनआईटी जालंधर परिसर में आयोजित किया गया। इसके बाद इंडियन सोसायटी ऑफ एरजेनिक्स (आईएसई) की वार्षिक आम बैठक हुई।मुख्यअतिथि फिलीपींस के एसीईडी के अध्यक्ष प्रो. रोजमेरी सेवा थे। उन्होंने कहा कि एर्गोनॉमिक्स टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों के लिए पुरानी सामग्रियों से बने नए उत्पादों के मूल्य को बढ़ाने का एक तरीका है। प्रो. जोस ऑरलैंडो गोम्स, डाॅ. एके गांगुली और कामना राज अग्रवाल और डाॅ. एच सागर बताैर विशेष अतिथि पहुंचे।

चीन के प्रो. एरिक मिंग यांग वांग ने स्वास्थ्य सुरक्षा उद्योग के श्रमिकों के साथ-साथ रोगियों से संबंधित खतरों से निपटने के लिए पहले सुरक्षा का मंत्र दिया। रजिस्ट्रार डाॅ. एसके मिश्रा, डाॅ. अजय गुप्ता, डाॅ. राकेश कुमार, डॉ. कपिल गोयल और डाॅ. राजीव वर्मा मौजूद रहे।

एनुअल इंटरनेशनल कांफ्रेंस में गणमान्य और फेकल्टी मेंबर।

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