डोकलाम विवाद में चीन को हद बताने वाले मनोज मुकुंद नरवणे अगले सेनाध्यक्ष हाेंगे, सेना के स्वदेशीकरण के हिमायती हैं



नई दिल्ली .सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे देश के नए सेनाध्यक्ष होंगे। नरवणे, एयर चीफ मार्शल अारकेएस भदाैरिया अाैर नाैसेना अध्यक्ष करमबीर िसंह तीनाें ने एनडीए से 56वां काेर्स एक साथ िकया था। लेफ्टिनेंट जनरल नरवणे काे ऑपरेशन और कमांड का लंबा अनुभव है। सितंबर में ही वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की जिम्मेदारी संभाली थी। वे जनरल रावत के बाद सबसे सीनियर अफसरों में से एक हैं।

हमारे पास तकनीक, अाॅर्डिनेंस फैक्ट्रियां; हम न िसर्फ अात्मनिर्भर हाें, िनर्यात भी करें

जनरल नरवणे ईमानदार अाैर धीर-गंभीर अफसर हैं। नरवणे ही वे अार्मी कमांडर हैं, जिन्होंने डाेकलाम संकट के समय चीन को उसकी हद बताई थी। वे अपनी त्वरित िनर्णय क्षमता अाैर काेई भी फैसला लेने से पहले अपने साथियाें काे सुनने की जबर्दस्त याेग्यता के िलए पहचाने जाते हैं। जब वे असम राइफल्स में इंस्पेक्टर जनरल (नाॅर्थ) थे, उस वक्त मुझे उनका साथ मिला। वे िसर्फ प्रासंिगक मामलाें पर फाेकस करते हैं अाैर अप्रासंगिक मामलाें से िवचलित नहीं हाेते।

मैंने उनसे सेना के अाधुनिकीकरण काे लेकर बात की थी, तब उन्हाेंने पुरजाेर तरीके से हिमायत की थी कि हमें स्वदेशीकरण करना चाहिए। चूंकि हमारे पास तकनीक है, सुव्यवस्थित अाॅर्डिनेंस फैक्ट्रियां हैं अाैर िनजी क्षेत्र की क्षमताएं हैं, इसलिए हमें काेई अायात नहीं करना चाहिए। हमें न िसर्फ अात्मनिर्भर हाेना चाहिए, बल्कि िनर्यात भी करना चाहिए।नरवणे मृदुभाषी हैं। वे जाे चाहते हैं, उसे करने में अपनी पूरी याेग्यता झाेंकते देखा है। वे िसर्फ पेशेवर हैं अाैर इसमें उनकी स्कूल टीचर पत्नी उतना ही सहयाेग करती हैं।-ले. जनरल (िर.) संजय कुलकर्णी, (िसयाचिन जाने वाले पहले सैन्य अफसर)

िसख लाइट इफेंट्री रेजीमेंट से कमीशन

  • 37 साल की सेवा में नरवणे जम्मू-कश्मीर अाैर पूर्वाेत्तर में तैनात रह चुके हैं।
  • नेशनल डिफेंस एकेडमी अाैर इंडियन मिलिट्री एकेडमी के छात्र रहे हैं।
  • सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल अाैर अति विशिष्ट सेवा मेडल से अंलकृत हाे चुके हैं।
  • कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इन्फैन्टियर ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं।

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Manoj Mukund Narwane, who has told China the extent in the Doklam dispute, will be the next army chief, advocating for the indigenization of the army