दस्तावेज अपलोड करने का आज अंतिम दिन




स्वच्छता सर्वेक्षण लीग-2020 का फाइनल 4 जनवरी से होने जा रहा है तथा इस संबंध में जरूरी दस्तावेज स्वच्छता सर्वेक्षण की साइड अपलोड करने की 27 दिसंबर अंतिम तारीख है।

दस्तावेज पूरे करने में कौंसिल के कर्मचारी पिछले एक सप्ताह से जुटे हुए हैं। 2019 में सर्वेक्षण में नवांशहर ने नार्थ जोन में सबसे अधिक 3556 अंक लेकर पहला स्थान पाया था, इसलिए इस बार नंबर वन के ताज को बचाने के लिए दबाव भी अधिक है। नंबरों की बात करें, तो नवांशहर नगर कौंसिल को सिटीजन फीड बैक में हमेशा ऊंचा स्थान मिलता रहा है। शहर के लोग कौंसिल के काम को पूरे नंबर देते हैं तथा पिछली बार भी इसी मद में कौंसिल को सबसे अधिक 1001 अंक मिले थे, जबकि डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन में 924, डाक्यूमेंटेशन में 880 तथा सर्टीफिकेशन में 750 नंबर मिले थे। पिछली बार कुल अंक पांच हजार थे, जबकि इस बार कुल अंक 6000 हैं। इनमें से 1500 नंबर फीड बैक तथा 1500 नंबर सर्टीफिकेशन के हैं तथा कौंसिल को भरोसा है कि फीड बैक व ओडीएफ प्लस प्लस आदि के सर्टीफिकेशन आदि के बल पर उन्हें इतने अंक मिल जाएंगे, कि 4 जनवरी के बाद जांच करने के लिए आने वाली टीम व डाक्यूमेंटेशन के नंबर मिला, वे रैंकिंग बचाने में कामयाब हो जाएंगे। इस बार पहली दो तिमाहियों व वार्षिक सर्वेक्षण का रिजल्ट एक साथ ही अप्रैल में आएगा।

नगर कौंसिल नवांशहर के दफ्तर में स्वच्छता संबंधी दस्तावेज साइट पर अपलोड करते कर्मचारी। -भास्कर

ताज की लाज रखने के लिए जुटे नगर कौंसिल कर्मचारी

फीडबैक और सर्टीफिकेशन के 3000 नंबरों पर भरोसा, अधूरी सेवाओं के कट सकते हैं अंक

नगर कौंसिल सिंगल यूज प्लास्टिक खत्म करने में असफल

स्वच्छता सर्वेक्षण 4 जनवरी से शुरू होगा तथा अब तक नगर कौंसिल शहर से सिंगल यूज प्लास्टिक खत्म करने में सफल नहीं हो पाई है। दो अक्तूबर को प्लास्टिक के खिलाफ नगर कौंसिल की ओर से शुरू किया गया अभियान कुछ दिनों में ही ठंडा पड़ गया। पहले तो नगर कौंसिल की ओर से प्लास्टिक के लिफाफे रखने वाले दुकानदारों के जमकर चालान काटे गए, लेकिन फिर मुहिम को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब यही प्लास्टिक कौंसिल की रैंकिंग में गिरवट का कारण भी बन सकती है। इस बार नवांशहर को नंबर वन के लिए मेहनत करनी होगी।

स्वच्छता रैंकिंग में ऐसे किया जाएगा मूल्यांकन

प्रोसेसिंग एंड डिस्पोजल को लेकर सबसे ज्यादा 700 अंक

1) सर्विस लेवल प्रोग्रेस में डोर टू डोर कलेक्शन के 100 अंक हैं, लेकिन डोर टू डोर कलेक्शन कम हो रही है, ऐसे में पूरे नंबरों पर संशय

2) 125 अंक सेग्रीगेशन के रखे गए हैं। शहर में 19 वार्ड हैं परंतु यह प्रैक्टिस 70 से 100 प्रतिशत है। सूखा व गीले कचरे को अलग-अलग कर उससे खाद या अन्य सामग्री तैयार करने की व्यवस्था चालू है। लेकिन शत-प्रतिशत सोर्स सेग्रीगेशन नहीं है।

3) 40 अंक वेस्टेज उठाने वाले वाहनों के हैं। गत 2 सालों स्वच्छता सर्वेक्षण में बढ़िया काम से मिली ग्रांट के चलते शहर को जेसीबी व छोटे ट्रक मिले हैं। इसी तरह 35 व 30 अंक शहर में पड़ी गंदगी की जानकारी देने व उसे हटाने के लिए है। इसमें नवांशहर को नंबर मिलने तय हैं।

4) 50 अंक हर वार्ड की दिन में 2 बार सफाई की है। लेकिन इसे लागू करने में नवांशहर अभी सफल नहीं हो पाया है। शहर में कहीं भी दिन में दो बार सफाई नहीं होती।

5) 40 अंक बारिश/आंधी में ड्रेनेज को लेकर है। इन दिनों शहर की हालत खस्ता ही रहती है। जबकि 30 अंक प्लास्टिक के फैस्टिवल/पब्लिक गेदरिंग में रोकने को लेकर है। 50 अंक सूखे व गीले कचरे को लेकर हैं।

6) 700 अंक प्रोसेसिंग एंड डिस्पोजल को लेकर हैं। इसमें भी कौंसिल काफी हद तक सफल है, लेकिन कूरकुरे, दूध के पैकेट आदि को लेकर हिमाचल की सीमेंट फैक्टरी के साथ अभी करार नहीं हो पाया है। इसलिए जहां भी नंबर कटने तय हैं।

7) 500 अंक सेनिटेशन के हैं।

8) 160 अंक शहर के होटल, स्कूल, कालेजेज, अस्पताल एवं मोहल्लों की साफ सफाई के हैं।

9) 60 अंक लोगों को जानकारी देने, 80 अंक लोगों द्वारा स्वच्छता रखे जाने के हैं।

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