दुष्कर्म के दोषी विधायक कुलदीप की सजा पर बहस हुई, 20 दिसंबर को कोर्ट फैसला सुना सकती है



नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के उन्नाव दुष्कर्म केस में दोषी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर दिल्ली की कोर्ट में मंगलवार कोबहस हुई। 20 दिसंबरको दोषी विधायक की सजा को लेकर बहस होगी। इसके बाद कोर्ट इस मामले मेंअपना अंतिम फैसला सुना सकती है। इससे पहले सुनवाई में सीबीआई ने दोषी विधायकके लिए अधिकतमसजा की मांग की। साथ ही,पीड़ित के लिए उचित मुआवजा भी मांगा।

सीबीआई की दलीलों पर सेंगर के वकीलों ने अदालत से उसे न्यूनतम सजा देने की प्रार्थना की। वकीलों ने कहा- उसकी दो नाबालिग बेटियां हैं और पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं रहा है। हिरासत में भी उसका आचरण अच्छा रहा है। इसलिए सजा सुनाते समय इन बातों पर भी विचार किया जाए। सेंगर के वकीलों ने यह भी कहा कि वह दशकों से सार्वजनिक जीवन में है और समाज की सेवा करता रहा है। उसने जन कल्याण के कई काम भी किए हैं।

कुलदीप को सोमवार को दोषी ठहराया गया

सोमवार को तीस हजारी कोर्ट नेभाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप (53) को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण का दोषी करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि एक ताकतवर इंसान के खिलाफ पीड़ित का बयान सच्चा और निष्कलंक है। पीड़ित की तरफ से कोर्ट में दोषी को उम्र कैद कीअपील की गई। कोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी शशि सिंह को बरी कर दिया था।

2017 का था मामला

कुलदीपसेंगर और उसके साथियों ने 2017 में लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसी साल जुलाई में पीड़ित की कार की ट्रक से भिड़ंत हो गई थी। हादसे में पीड़ित की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। पीड़ित लड़की और उसके वकील तभी से दिल्ली एम्स में भर्ती हैं।सेंगर फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।

कोर्ट ने सीबीआई को लगाई थीफटकार:

  • न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा- पीड़ित का यह बयान कि उसका यौन शोषण हुआ, मुझे यह सच्चा और निष्कलंक लगता है। उसे धमकाया गया था और वह परेशान थी। वह किसी कॉस्मोपॉलिटन के शिक्षित इलाके की नहीं, गांव की लड़की है। सेंगर एक ताकतवर शख्स था। ऐसे में पीड़ित ने अपना समय लिया।
  • न्यायाधीश ने कहा, “जब पीड़ित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा, तब उसके परिवार के खिलाफ कुछ आपराधिक मुकदमे दर्ज करा दिए गए। इनमें सेंगर का प्रभाव दिखाई दे रहा था।’
  • अदालत ने दुष्कर्म के मामले में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि इससे सेंगर और अन्य के खिलाफ ट्रायल में देरी हुई। कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारी की गैर-मौजूदगी में जांच की गई और आरोप तय किए गए। इस बात की फिक्र भी नहीं की गई कि यौन शोषण की पीड़ित किस यातना से गुजरेगी और दोबारा उस पीड़ा को भोगेगी।
  • कोर्ट ने नाराजगी जताई कि जांच एजेंसी ने पीड़ित के बयान से जुड़ी चुनिंदा जानकारी को बाहर भेजा ताकि पीड़ित के केस पर पर्दा डाला जा सके। पॉक्सो एक्ट में कोई खामी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके निष्प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों में मानवीय नजरिए की कमी ने हालात को ऐसा बना दिया, जहां इंसाफ में देरी हुई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दिल्ली ट्रांसफर हुआ था
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस लखनऊ से दिल्ली कोर्ट ट्रांसफर हुआ था। इसके बाद 5 अगस्त से रोजाना बंद कमरे मेंसुनवाई हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों से जिरह हुई। पीड़ित का बयान दर्ज करने के लिए एम्स में स्पेशल कोर्ट बनाया गया था। तीस हजारी कोर्ट ने10 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा था।

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कुलदीप सेंगर इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।