पाकिस्तान के हिंदुओं ने कहा- कृपया हमारे दर्द को समझें, संशोधित नागरिकता कानून का विरोध न करें



नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं ने लोगों से नागरिकता कानून का विरोध न करने की अपील की। उन्होंने कहा- प्रदर्शनकारी हमारे दर्द को समझें।इसके खिलाफ विरोध न करें। दरअसल, नागरिकता संशोधित कानून का पूरे देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी दलों का मानना है कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण वाला है।

मीरा दास (40) ने कहा, “हमने पाकिस्तान में अपना घर, जमीन और सबकुछ छोड़ दिया है। अब यह हमारा घर है। यदि आप हमें स्वीकार नहीं करेंगे तो हम कहां जाएंगे? कृपया हमारे दर्द को समझें। जो कुछ हमारे घाव को भरने की कोशिश चल रही है, उसका विरोध न करें।” मीरा की एक महीने की बेटी है। नागरिकता कानून बनने के बाद मीरा ने अपनी बेटी का नाम ‘नागरिकता’ रखा है।

31 दिसंबर, 2014 तक भारत आने वालों को नागरिकता
नागरिकता संशोधन कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार बन रहे अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता का विकल्प देता है। कानून में इन तीन देशों से पलायन करके 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, पारसी, सिख, ईसाई, बौद्ध समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।

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नागरिकता संशोधित कानून का पूरे देश भर में विरोध हो रहा हैं।