8 साल तक मां नहीं बन सकीं गीतांजलि अब फर्टीलिटी दोस्त हैं, 50 हजार जोड़ों की मदद की



नई दिल्ली (शरद पाण्डेय).ओवेरियन कैंसर, मिसकैरेज और आईवीएफ फेल होने से दिल्ली की गीतांजलि बनर्जी ने आठ साल तक इनफर्टीलिटी का दर्द झेला। डॉक्टरोें ने यहां तक कह दिया था कि वह मां नहीं बन सकती हैं। पर उन्होंने हार नहीं मानी। फिर से आईवीएफ की कोशिश की, जो सफल रही। इसके बाद तय किया कि इनफर्टीलिटी से परेशान जोड़ों के लिए कुछ करेंगी। इसमें उनके कर्नल पति और परिवार ने हिम्मत दी। गीतांजलि ने दो साल तक रिसर्च कर 2015 में फर्टीलिटी दोस्त साइट बनाकर काउंसिलिंग शुरू की। अब तक वह देशभर के करीब 50 हजार जोड़ाें की काउंसिलिंग कर चुकी हैं।

गीतांजलि बताती हैं कि लखनऊ के एक जोड़े ने उन्हें इनफर्टीलिटी की समस्या बताई थी। हमने उन्हें आईवीएफ सेंटर जाने को कहा। इस पर जोड़े ने कहा कि अगर मोहल्ले का कोई व्यक्ति सेंटर के आसपास देख लेगा तो परेशानी हो जाएगी। गीतांजलि कहती हैं कि आज भी इनफर्टीलिटी सामाजिक वर्जना है। कहीं लोग इसे छिपाते हैं तो कहीं ताने मिलते हैं।

काउंसलिंग ऑनलाइन

वह साइट, फेसबुक, ब्लॉग, वाॅट्सएप से जोड़ों की काउंसिलिंग करती हैं। आज दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलुरू समेत अन्य शहरों में काउंसिलिंग सेंटर चल रहे हैं। इनमें इनफर्टीलिटी सपोर्ट, हैपीनेस, एडॉप्शन और प्री आईवीएफ प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। वेबसाइट बनाने से पहले फेसबुक में सीक्रेट ग्रुप बनाया। जल्द ही इससे 250 महिलाएं जुड़ गईं। इस काम में क्लीनिक से सहयोग मिलता है। कंपनियों के सीएसआर फंड से भी मदद मिलती है।

देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी से परेशान
मौजूदा समय में देशभर में 3.3 करोड़ जोड़े इनफर्टीलिटी का दर्द झेल रहे हैं। हर चार में से एक को किसी न किसी वजह से यह समस्या है। इनमें से तमाम जोड़े इनफर्टीलिटी की समस्या बताने से भी डरते हैं। दुनिया में इसका 29 हजार करोड़ रुपए का बाजार है।

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गीतांजलि बनर्जी काउंसिलिंग सेंटर से इनफर्टीलिटी सपोर्ट, हैपीनेस, एडॉप्शन और प्री आईवीएफ प्रोग्राम चलाती हैं।