चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड का विरोध करेगा, चंदे का स्रोत जानने का अधिकार छीना गया था



नई दिल्ली. (हेमंत अत्री). चुनाव आयोग ने भाजपा सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम काविरोध करने का फैसला किया है। सरकार ने चुनाव में फंडिग करने के इरादे से इसकी शुरुआत की थी। आयोग ने तय किया कि वह 25 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए 37 पेज के शपथपत्र के तहत अपने पुराने रूख पर ही कायम रहेगा। साथ ही आयोग, राजनीतिक दलों द्वारा सीलबंद लिफाफे में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के तहत दी गई जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट से साझा करेगा। आयोग ने गुरुवार को बैठक में इस पर फैसला लिया।

सूत्रों के मुताबिक, सभी ने माना कि आयोगइस मामले पर अपने स्टैंड से सुप्रीम कोर्ट को अवगत करा चुका है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आयोग को फरवरी के पहले सप्ताह तक एडीआर द्वारा दायर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना है। बॉन्ड के प्रति इसी तरह का रूख आयोग ने मई 2017 में कानून मंत्रालय को बता दिया था। तब आयोग ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक फंडिंग पर गंभीर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय को लिखा यह पत्र भी कोर्ट को सौंपे जाएंगे।

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चुनाव आयोग ने मई 2017 में कानून मंत्रालय से इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी।