दावोस में वैश्विक नेताओं पर फिर भड़कीं ग्रेटा, कहा- आपने बेहतर जलवायु करने के नाम पर सिर्फ हमें नाउम्मीद किया



दावोस. स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग स्विट्जरलैंड के दावोस में 21 जनवरी से शुरू हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) में शामिल हुईं। यहां उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स और डब्ल्यूईएफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। कहा- दुनिया में भीषण तबाही के बावजूद नेताओं ने कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में कुछ नहीं किया। जलवायु संकट पर जागरुकता बढ़ी लेकिन कुछ खास नहीं बदला। ग्रेटा ने वैश्विक नेताओं से कहा कि आपने जलवायु को बेहतर करने के नाम पर केवल हमें नाउम्मीद किया है।

हमारे घर जल रहे: ग्रेटा

ग्रेटा ने कहा, ‘‘मैं एक साल पहले दावोस आई थी। आप लोगों से कहा था- हमारे घर जल रहे हैं। मैं चाहती थी कि आप पर्यावरण को लेकर उचित कदम उठाएं। लेकिन, आपने सिर्फ हवाई बातें की, खोखले वादे किए। जब बच्चे आपसे जलवायु को लेकर संजीदा होने के लिए कह रहे हैं तो आपको गंभीर होना चाहिए। हम चाहते हैं कि आप काल्पनिक तकनीक की बात न करें। वर्तमान की जरूरतें हैं, उनको ठोस तरीकों से पूरा किया जाए।

‘‘हम आपसे यह भी नहीं कह रहे कि आप ‘जीरो उत्सर्जन’ या ‘कार्बन न्यूट्रेलिटी’ तक पहुंचने के बारे में बात करते रहें। जैसा आप हमेशा आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर लोगों के सामने पेश करते हैं। आप अफ्रीका के रेगिस्तानी क्षेत्र में पेड़ लगाने की बात करते हैं, जबकि अमेजन के जंगलों की कटाई जारी है। पेड़ लगाना निश्चित रूप से अच्छा कदम है। लेकिन, पेड़ लगाने के लिए जो काम किए जाने चाहिए थे, उसके मुकाबले यह पर्याप्त नहीं है। कम से कम यह वास्तिवक प्रकृति की जगह तो नहीं ही ले सकता।’’

‘‘मैं साफ शब्दों में कहना चाहती हूं कि आप हमें लोअर कार्बन इकोनॉमी और कम उत्सर्जन करने के नाम पर बेवकूफ बनाना बंद करें। अगर 1.5° के लक्ष्य से नीचे रखना है तो हमें कार्बन उत्सर्जन को रोकना होगा। अगर हम लगातार कार्बन डाईऑक्साइड पर आए बजट को नजरअंदाज करते रहेंगे, तो जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकते। हमें बजट खर्च करने की जरूरत आज है न कि भविष्य में। अगर ऐसे ही कुछ सालों तक कार्बन उत्सर्जन जारी रहा तो बजट बेकार हो जाएगा।’’

‘‘अमेरिका पेरिस समझौते से अलग हो गया है। यह सभी के लिए चिंता की बात है। लेकिन सच्चाई यह है कि पेरिस समझौते में शामिल किसी देश ने अपनी जिम्मेदारी नहीं दिखाई है। आपकी योजनाएं या नीतियां 1.5° के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपर्याप्त है। हमें आपकी पार्टी पॉलिटिक्स की परवाह नहीं है। जलवायु संकट के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार है। सभी राजनीतिक विचारधारा या आर्थिक संगठन जलवायु और पर्यावरण संकट से निपटने में विफल रही है।’’

‘‘आप कहते हैं, बच्चों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हम सब संभाल लेंगे। हम आपसे वादा करते हैं। लेकिन, आपने कुछ नहीं किया। आप ने कहा कि नाउम्मीद मत होइए और उसके बाद शांत हो गए। आप सब ने केवल खोखले वादे किए हैं। मैं डब्ल्यूईएफ की 50वीं वार्षिक बैठक में जलवायु कार्यकर्ताओं की टीम के साथ शामिल हुई हूं। हमारी इस समिट में शामिल उद्योगपतियों, राजनेताओं से यही मांग है कि जलवायु संकट को लेकर बेहतर और उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है।’’

कल के मूर्खों के वारिस भविष्य बताने वाले बन रहे: ट्रम्प

इस समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल हुए। उन्होंने जलवायु कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा और कहा कि कल के मूर्खों के वारिस भविष्य बताने वाले बन रहे हैं। यह आशावाद का समय है। हमें हर समय कयामत का गाना गाने वाले भविष्यवक्ताओं और उनकी भविष्यवाणी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। ऐसे लोग जनसंख्या की भीड़ और तेल खत्म होने की बात करते हैं। ऐसे कट्‌टरपंथी समाजवादियों को हम अर्थव्यवस्था नष्ट नहीं करने देंगे। अमेरिका भी एक लाख करोड़ पेड़ की मुहिम में शामिल होगा, जो दावोस में लॉन्च की गई है।

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17 साल की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) में नेताओं को संबोधित करते।