सीनेट में ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू, वकीलों की बड़ी टीम बचाव के लिए तैनात



वॉशिंगटन. अमेरिका के सीनेट (उच्च सदन) में मंगलवार से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू हुई। ट्रम्प के बचाव के लिए वकीलों की एक बड़ी टीम तैनात की गई है।इस टीम में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई में शामिल हुए वकील भी हैं। उनके वकीलों ने ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था कि डेमोक्रेट्स द्वारा सदन में लाया गया महाभियोग प्रस्तावअमेरिकी लोगों केस्वतंत्र रूप से अपनाराष्ट्रपति चुनने के अधिकारपर हमला है।

भारतीय समय के मुताबिक महाभियोग की सुनवाई मंगलवार रात 11.30 बजे से शुरू हुई। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की देखरेख में यह कार्रवाई हो रही है। पिछले हफ्ते सीनेट में जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने सांसदों को ‘निष्पक्ष न्याय’ करने की शपथ दिलाई थी। सबसे पहले ट्रम्प पर लगे आरोपों पर बहस होनी है। पिछले साल 18 दिसंबर को हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (निचली सदन) में ट्रम्प के खिलाफ सीनेट में महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने की इजाजत दी गई थी।

सीनेट में रिपब्लिकन को बहुमत

हालांकि, ट्रम्प महाभियोग की कार्रवाई में शामिल नहीं हो पाएंगे। वह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने दावोस (स्विट्जरलैंड) गए हैं। वे लगातार कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। 100 सीटों वाले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी बहुमत में है। उसके 53 सांसद हैं और डेमोक्रेट पार्टी के पास 47 सांसद। उच्च सदन में ट्रम्प को हटाने के लिए डेमोक्रेट्स को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यानी ट्रम्प के खिलाफ करीब 67 सांसदों को वोट करना होगा, जो कि बेहद मुश्किल है।

ट्रम्प पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप
ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने दो डेमोक्रेट्स और अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला था। निजी और सियासी फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 2020 राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए अपने पक्ष में यूक्रेन से विदेशी मदद मांगी थी। जांच कमेटी के सदस्यों ने कहा था कि ट्रम्प ने राष्ट्रपति पद की गरिमा को कमजोर किया। उन्होंने अपने पद की शपथ का भी उल्लंघन किया।

दिसंबर 2019 को सदन में प्रस्ताव पास हुए थे
पेलोसी ने पहली बार सितंबर 2019 में ट्रम्प पर देश को धोखा देने का आरोप लगाया था। 19 दिसंबर 2019 को उनके खिलाफ महाभियोग के लिए सदन में दो प्रस्ताव पेश किए गए थे। प्रस्तावों पर वोटिंग के दौरान डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प के खिलाफ और रिपब्लिकन ने ट्रम्प के पक्ष में वोटिंग की। दोनों प्रस्ताव के पक्ष में 230 और विपक्ष में 197 वोट पड़े थे। उन्होंने दो डेमोक्रेट्स और अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला था। निजी और सियासी फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 2020 राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए अपने पक्ष में यूक्रेन से विदेशी मदद मांगी थी।

अमेरिका में राष्ट्रपति के खिलाफ अभियोग के मामले:

  • 1868 में अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ अपराध और दुराचार के आरोपों पर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग प्रस्ताव पास हुआ। उनके खिलाफ संसद में आरोपों के 11 आर्टिकल्स पेश किए गए। हालांकि, सीनेट में वोटिंग के दौरान जॉनसन के पक्ष में वोटिंग हुई और वे राष्ट्रपति पद से हटने से बच गए।
  • 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ भी महाभियोग लाया गया था। उन पर व्हाइट हाउस में इंटर्न रही मोनिका लेवेंस्की ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्हें पद से हटाने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन सीनेट में बहुमत नहीं मिल पाया।
  • वॉटरगेट स्कैंडल में पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (1969-74) के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई होने वाली थी, लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया। उन पर अपने एक विरोधी की जासूसी का आरोप लगा था।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


अमेरिकी इतिहास में ट्रम्प तीसरे राष्ट्रपति जिनपर महाभियोग लगा।